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Sura 25
Aya 29
29
لَقَد أَضَلَّني عَنِ الذِّكرِ بَعدَ إِذ جاءَني ۗ وَكانَ الشَّيطانُ لِلإِنسانِ خَذولًا

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

उसने मुझे भटकाकर अनुस्मृति से विमुख कर दिया, इसके पश्चात कि वह मेरे पास आ चुकी थी। शैतान तो समय पर मनुष्य का साथ छोड़ ही देता है।"