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39
وَالقَمَرَ قَدَّرناهُ مَنازِلَ حَتّىٰ عادَ كَالعُرجونِ القَديمِ

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

और हमने चाँद के लिए मंज़िलें मुक़र्रर कर दीं हैं यहाँ तक कि हिर फिर के (आख़िर माह में) खजूर की पुरानी टहनी का सा (पतला टेढ़ा) हो जाता है