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13
قَد كانَ لَكُم آيَةٌ في فِئَتَينِ التَقَتا ۖ فِئَةٌ تُقاتِلُ في سَبيلِ اللَّهِ وَأُخرىٰ كافِرَةٌ يَرَونَهُم مِثلَيهِم رَأيَ العَينِ ۚ وَاللَّهُ يُؤَيِّدُ بِنَصرِهِ مَن يَشاءُ ۗ إِنَّ في ذٰلِكَ لَعِبرَةً لِأُولِي الأَبصارِ

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

बेशक तुम्हारे (समझाने के) वास्ते उन दो (मुख़ालिफ़ गिरोहों में जो (बद्र की लड़ाई में) एक दूसरे के साथ गुथ गए (रसूल की सच्चाई की) बड़ी भारी निशानी है कि एक गिरोह ख़ुदा की राह में जेहाद करता था और दूसरा काफ़िरों का जिनको मुसलमान अपनी ऑख से दुगना देख रहे थे (मगर ख़ुदा ने क़लील ही को फ़तह दी) और ख़ुदा अपनी मदद से जिस की चाहता है ताईद करता है बेशक ऑख वालों के वास्ते इस वाक़ये में बड़ी इबरत है